मंगलवार, 6 अक्तूबर 2009

प्यारेलाल जी नहीं रहे....

मध्यप्रदेश में जनसंघ और संघपुत्री भाजपा को जिन लोगों ने चना चबेना खाकर शहर शहर कस्बे कस्बे और गांव गांव घूमकर पोषित पल्लवित किया, उन सम्मानीय कार्यकर्ताओं में से एक प्यारेलाल जी नहीं रहे। भाजपा के राष्टीय उपाध्यक्ष, महासचिव, दिग्विजय सिंह को हराकर राजगढ से लोकसभा सदस्य रहे प्यारेलाल खंडेवाल का आज निधन हो गया। शाम पांच बजे भोपाल में उस स्थल के करीब उनकी अंत्येष्टि होगी जहां कुशाभाउ ठाकरे पंचतत्व में विलीन हुए थे। श्री खंडेलवाल वर्तमान में मप्र से राज्यसभा सदस्य थे। कैंसर जैसी घातक बीमारी से सालों से लडते रहे और बार बार उसे चित भी करते रहे प्यारेलाल जी को पिछले महीने ह्रदयाघात के बाद दिल्ली में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। करीब चार साल पहले मप्र भाजपा ने उनका अम्रत महोत्सव आयोजित किया था। मप्र मंें भाजपा जिन लोगों के पसीने से लहलहाती फसल बनी उनमें कुशाभाउ ठाकरे के साथ प्यारेलाल खंडेलवाल और नारायण प्रसाद गुप्ता का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्ष 2003 में मप्र में भाजपा की सरकार बनने से पहले मैंने उनसे लंबी बातचीत की थी, यह साक्षात्कार 28 सितंबर को प्रकाशित भी हुआ था। उस वक्त नौ साल से जमी दिग्विजय सरकार को उखाडने के लिए भाजपा ने कमर कस ली थी, उमा भारती को सीएम प्रोजेक्ट करने की सुगबुगाहट शुरू ही हुई थी। आडवाणी खेमा इसके लिए माहौल बनाने के प्रयास में था। ऐसे में इस बातचीत में श्री खंडेलवाल ने किसी को भी सीएम प्रोजेक्ट करने की खिलाफत की थी, उनका विरोध व्यक्ति से नहीं था, वे सैद्धांतिक विरोध कर रहे थे। बाद में उनकी कही बातें सच हुईं, उमा भारती मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहीं, बाबूलाल गौर आए फिर शिवराज सिंह चैहान। यह साबित हो गया कि वोट पार्टी का था उमा का नहीं और न ही अब जिस वोट से भाजपा की सरकार बनी है वह शिवराज का वोट है। जाति के मामले में भी यही हुआ। प्रसंगवश यह साक्षात्कार में यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रहा हूं।
मैं किसी को सीएम प्रोजेक्ट करने के पक्ष में नहीं: खंडेलवाल

सतीश एलिया


भोपाल, 27 सितंबर २००२


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्यारेलाल खंडेवाल मप्र में विधानसभा चुनाव में किसी भी नेता को सीएम प्रोजेक्ट कने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि चुाव किसी एक नेता के बलबूते नहीं जीता, पार्टी का जनाधार सरकार बनाता है। मप्र में भाजपा का जनाधार किसी व्यक्ति या जातिगत आधार पर नहीं है। इस संवाददाता से खास मुलाकात में श्री खंडेलवाल ने कहा कि मप्र में कोई व्यक्ति या जातीय समीकरण महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि पार्टी का जनाधार ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि अब तक के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने प्रदेश में किसी एक नेता को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं किया। मेरी राय में ऐसा किया भी नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीतने के लिए पार्टी के जनाधार के अलावा यह महत्व रखेगा कि जीतने की क्षमता वाले प्रत्याशियों को टिकिट दिए जाएं। श्री खंडेलवाल ने दावा किया कि माहौल भाजपा के पक्ष में नजर आ रहा है, हालांकि चुनाव में अभी सवा साल बाकी है।पार्टी संगठन में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर श्री खंडेवाल ने कहा कि युवाओं को आगे लाना एक प्रयोग है। लीक से हटकर नई व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है। पार्टी की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच यह प्रयोग किया गया है। दो अक्टूबर से सदस्यता अभियान शुरू होगा, इसके बाद संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। संगठन चुनाव ही कसौटी होंगे कि प्रयोग सफल रहा या असफल।मप्र में युवा नेत्रत्व के बजाय अनुभव को तरजीह दी जाने को उचित ठहाते हुए श्री खंडेलवाल ने कहा कि युवाओं को आगे लाने का मतलब अनुभवी नेताओं को घर बैठा देना नहीं हो सकता। मप्र भाजपा अध्यक्ष कैलाश जोशी की टीम में अपेक्षाक्रत युवा लोगों को जगह मिली है।श्री खंडेलवाल ने सवालों के जवाब में कहा कि गांव चलो अभियान के दौरान उन्होंने पाया कि आतंकवाद के मामले मंे देशवासियों के धैर्य की सीमाएं टूट चुकी हैं और अब वक्त आ गया है कि भारत को पाकिस्तान में चल रहे ट्रेनिंग कैंप तबाह कर देना चाहिए। भाजपा इस बारे में शिव सेना की राय से पूरी तरह सहमत है। पार्टी जनता की इस भावना से केंद्र सरकार को अवगत कराएगी। लोग अब आतंकवाद को मुह तोड जबाव देने के बयान सुनने के बजाय एक्शन चाहते हैं। भारत पाकिस्तान में चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैंपों को नष्ट करने जैसा सख्त कदम उठाए तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस कदम का विरोध नहीं करेगा, क्योंकि दुनिया पाकिस्तान की करतूतों को अनदेखा नहीं कर सकती है। शिवसेना सुप्रीमो की एनडीए सरकार से समर्थन वापसी की धमकी पर श्री खंडेलवाल ने कहा कि सरकार में रहना न रहना शिवसेना का अपना मामला है, इसके लिए वह स्वतंत्र है।जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में संघ समर्थित मोर्चा और भाजपा के आमने सामने आने के मामले में भाजपा उपाध्यक्ष ने कहा कि मोर्चा राज्य को दो नए राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में बांटने का पक्षधर है। जबकि भाजपा इससे सहमत नहीं है। इस असहमति के बावजूद चुनाव में मोर्चे और भाजपा ने मिलकर ही चुनाव लडा है, पार्टी को चुनाव में कोई नुकसान नहीं होगा।राम मंदिर, समान नागरिक कानून और धारा 370 के मुददे पीछे धकेल दिए जाने के सवाल पर श्री खंडेलवाल ने कहा कि प्राथमिक मुददे समय के साथ बदल जाते हैं। एनडीए के एजेंडे से सरकार चल रही है। लेकिन भाजा के एजेंडे में भी अब सबसे उपर सरकार का परफार्मेंस तथा विश्व में भारत की प्रतिष्ठा है। भाजपा ने तीनों मुददे छोडे नहीं हैं लेकिन वे अब प्राथमिक मुददे नहीं हैं। इनके बिना भी 1996 में भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलीं। पार्टी के गांव चलो अभियान के बारे में श्री खंडेलवाल ने बताया कि कार्यकर्ता देश के दो लाख गांवों में पहुंचकर केंद्र सरकार की योजनाओं का जायजा लेंगे। फीड बैक सरकार को दिया जाएगा। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा आयोजन पहली बार कर रही है, हालांकि मप्र, हरयाणा और उडीसा में अलग अलग नामों से इसी तरह के अभियान चलाए जा चुके हैं। मप्र में 88-89 में ग्राम राज अभियान चलाया गया था। हरयाणा, उडीसा में गांव राज अभियान तथा उप्र में एक रात गांव में अभियान चल चुके हैं। इनसे भाजपा का गांवों में जनाधार बढा है। अर्से तक मप्र में पार्टी की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे खंडेलवाल ने बताया कि संगठन को उनकी जरूरत उन राज्यों में ज्यादा है, जहां पार्टी का फैलाव कम है। वे अभी उडीसा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रभारी हैं। अगले माह पूर्वोत्तर का दूसरा दौरा शुरू करेंगे।

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